जब मैं मेरे होता हूँ
तो परम् घेरे में होता हूँ ।
जब मैं अकेले में होता हूँ।
तो मैं झमेले में होता हूँ ।
जब में एकान्त होता हूँ।
तो मैं शान्त होता हूँ ।
जब मैं भक्ति में होता हूँ ।
तो मैं शक्ति में होता हूँ ।
जब मैं नृत्य में होता हूँ ,
महान कृत्य में होता हूँ ।
जब मैं आहों में होता हूँ ,
सुनसान राहों में होता हूँ ।
जब मैं ध्यान में होता हूँ ,
तो भगवान् में होता हूँ ।
जब मैं प्यार में होता हूँ ,
सर्व स्वीकार में होता हूँ ।
जब मैं मुझमें होता हूँ ,
तो तुझमें भी होता हूँ ।
मेरा क्या? होता हूँ बस ।
कहीं न कहीं ।।
- ओम पंवार
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